सारणेश्वर महादेव मंदिर गंगरार
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सारणेश्वर महादेव मंदिर गंगरार

Gangrar Temple
गंगरार स्थित सारणेश्वर महादेव मंदिर महाभारत के समय का मंदिर है यह मंदिर गंगरार के पूर्व में गांव और रेल्वे स्टेशन दोनो के मध्य में है। जिस स्थान को पंचनागदी ( पांच नागों के घर ) कहते है। यह स्थान प्राकर्तिक वातावरण से परिपूर्ण है एवं बहुत ही सुन्दर नजारा हे मंदिर के पास ही हिन्दुओ का मोक्ष धाम है जहा मृत्यु उपरांत अंतिम संस्कार किया जाता है मंदिर के अंदर व बहार 7 प्राचीन कुंड हे जिनमे प्रमुख है। गंगा कुंड, भीष्मपितामः कुंड, कार्तिक कुंड, अस्थि कुंड, आदि ये सभी कुंडो का अपना अपना महत्व है। सारणेश्वर महादेव मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि का 3 दिवसीय मेले का आयोजन होता है। जिसमे सांस्कृतिक, धार्मिक, आयोजन होते है एवं मंदिर के बहार विश्वकर्मा जी का मंदिर भी स्थित है।

स्थापना

इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में भीष्मपिताम: ने की थी, भीष्मपिताम: ने इस मंदिर में बरगद के पेड़ के निचे कई वर्षो तक तपस्या की थी द्वापर युग में महाभारत काल में राजा शांतनु थे जिनके पुत्र भीष्म हुए उनके भाई चित्र और विचित्र थे जब उन दोनों भाई ने अपना आप को अग्नि में भस्म कर दिया। तब भीष्मपितामह उन दोनों भाइयो की तलाश में निकले और यहा आकर उन्हें पता चला तो उन्होंने अपने भाइयो की अस्थि विसर्जन के लिए वर्तमान में सारणेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध स्थान पर आकर उन्होंने तपस्या कर माँ गंगा का आवाह्न कर गंगा को प्रकट किया। जिससे गंगा माँ ने प्रकट होकर यहा गंगा जल के कुंड प्रकट किये और फिर भीष्म पितामह ने इसी गंगा कुंड में अपने भाईयों को गंगा जल में विलीन कर उन्हें गंगा माँ की शरण में अर्पण कर दिया जब से इस स्थान का नाम सारणेश्वर पड़ गया। इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ ( शिव जी ) का स्वयंभू लिंग है। एवं बिलकुल उनके सामने माँ गंगा का मंदिर और इनके बिच में गंगा कुंड स्थापित है। इसी कुंड के पानी से रोज भगवान भोलेनाथ का स्न्नान आदि होते हे। मंदिर के दक्षिण भाग में गांगेय जी का मंदिर हे जहा भीष्मपितामः ने तपश्या की थी जहा पर आज भी इस का शिलालेख मौजूद है। गंगा कुंड के दाई और भीष्म कुंड है जिसका निर्माण स्वयं भीष्म पितामह ने स्वयं के लिए किया था इसके अलावा यहा पर पांच कुंड प्रसिद्ध है जिनका पानी मौसम के अनुरूप रहता था जिनमे अस्थि कुंड प्रमुख है।

अस्थि कुंड

इस कुंड की विशेषता हे की यहा पर मृत्यु उपरांत अस्थियों को यहां के जल के साथ इस कुंड में विसर्जन करने से इसमें सभी अस्थिया एक सप्ताह से 15 दिन के बिच गल कर जल में विलीन हो जाती हे यह सम्पूर्ण भारत में एकमात्र ऐसा स्थान हे।

गंगा कुंड

इस कुंड की और इस स्थान की व्याख्या करना बहुत ही बड़ी बात हे जैसे गंगा जल वैसे ही यहा के गंगा कुंड का जल हे जो किसी भी बर्तन, बोतल, में भर के रख दो कभी भी खराब नहीं होता है और सदैव जैसा होता हे वैसे ही रहता है। इस नगर का प्राचीन नाम भी इसी आधार पर पड़ा था गंगाहर, गंगाधार ( गंगा की धार ) था। जो अंग्रेजी शासन काल में गंगराल होकर वर्तमान में गंगरार है। एवं इसका एक नाम और भी हे रामगढ़ |

एक प्राचीन किवदंती ( पुरानी कहानी ) है

एक समय की घटना है जब सारणेश्वर महादेव मंदिर के यहा एक महाराज ( पंडित जी ) रहा करते थे जिनका नाम जती जी था, वह यह भगवान भोलेनाथ की सेवा करते थे। लोग उनको बहुत मानते थे। एक बार यहाँ पर जुग ( पुरे गांव के लिए खाने ) का आयोजन किया गया उस समय कुछ ज्यादा संसाधन नहीं थे तो मालपुए, खीर, पूरी, सब्जी, बनाये जा रहे थे और गांव के सभी लोग खाना खाने के लिए आते जा रहे थे। तभी मालपुए के लिए घी काम पड़ने लगा था तो लोगो ने गांव में जाकर सभी दुकानों व सभी के गर पर जितना घी मिल सकता था वो लेके आये लेकिन फिर भी उससे काम बनता नहीं दिखा तो लोगो आस पास के गावो में जाकर पूछा तो कही भी घी की पूर्ति नहीं हो पाई और उस समय चित्तौड़ और भीलवाड़ा जाने के लिए ऐसे साधन नहीं थे तो लोगो ने सोचा की घी के बिना खाना बनाना मुश्किल हे तो फिर सब ने जति जी महाराज से पूछा की अब क्या करे महाराज तो उस समय जति जी ने कहा की में तुम लोगो की सहायता तो कर दूंगा लेकिन मुझे वचन दो की जितना तुम लोगे उतना ही वापस करोगे। तो लोगो ने कहा ठीक हे फिर जति जी महाराज ने कहा की तुम कुंड से जितना चाहिए उतना पानी निकाल लो और उससे खाना बना लो। तो लोगो कहा की पानी से मालपुए कैसे निकलेंगे तो उन्होंने कहा की तुम तो निकाल लो निकल जायेंगे। फिर लोगो ने कुंड से जितना जरुरत थी उठा पानी निकल कर उसे जैसे ही कढ़ाई में डाला और वो घी बन गया और मालपुए निकल गए। फिर जति जी महाराज ने कहा की जितना आपने पानी निकाला था उतना ही घी बाजार से खरीद कर वापस कुंड में डाल देना फिर उसके बाद लोगो ने वापस बाजार घी खरीद कर कुंड में डाल दिया। और आज भी यहा मंदिर के पीछे जति जी की समाधी बनी हुई हे लोगो का आज भी मानना हे की यह घटना सत्य थी

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6 Comments

  1. gangrar is beautiful village

  2. Anil Mungad says:

    Gangrar ki dharati ko pranam

  3. raj jaiswal says:

    भाई तुम्हें प्रणाम

    गंगरार के इतिहास का बहुत ही सुन्दर बखान किया हे
    इसी तरह गढ़ बालाजी ओर गंगरार फ़ोर्ट का भी इतिहास बताना

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