Shree Charbhuja Nath Temple Gadhbor
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Shree Charbhuja Nath Temple Gadhbor

Charbhuja Nath Gadhbor

श्री गढ़बोर चारभुजा नाथ मंदिर राजसमंद


गंगरार से लगभग 160 किलोमीटर दूर गढ़बोर चारभुजा एक ऐतिहासिक एवं प्राचीन हिन्दू मन्दिर है जो भारतीय राज्य राजस्थान के राजसमंद ज़िले की कुम्भलगढ़ तहसील के गढ़बोर गांव में स्थित है। चित्तौडगढ़ से लगभग 160, उदयपुर से 112, राजसमंद से 43, और कुम्भलगढ़ से 32 कि.मी. की दूरी पर मेवाड़ का जाना – माना तीर्थ स्थल हैं, जहां चारभुजा जी की बड़ी ही पौराणिक चमत्कारी प्रतिमा हैं। मेवाड़ के चार प्रमुख स्थल केसरियाजी, कैलाशपुरीजी और नाथद्वारा श्रीनाथ जी के साथ गडबोर चारभुजा जी भी हैं। इस मन्दिर का निर्माण 1444 ईसवीं में राजा गंग सिंह ने करवाया था। एक मन्दिर में मिले शिलालेख के अनुसार यहां इस क्षेत्र का नाम "बद्री" था जो कि बद्रीनाथ से मेल खाता है।

इतिहास :

इसका नाम करण गढ़बोर गढ़ यानि किला एवं इसका निर्माण बोर राजपूतो ने करवाया अतः गढ़ बोर कहलाता है एवं चारभुजाजी इसे भगवान चारभुजा नाथ मंदिर हे इसलिए ऐसे में यह चारभुजा के नाम से भी प्रसिद्ध है।
यह मंदिर की इतिहास जब का हे जब गढ़बोर के तत्कालीन राजा गंग देव को स्वप्न में दर्शन हुआ की एक मूर्ति जल में मिलेगी जिसकी स्थापना वह करवा दे उसने ऐसा ही किया प्राप्त मूर्ति को गढ़ यानि किले में स्थापित करवा दी। यह कार्य 1444 ईस्वी में सम्पदित किया गया । ऐसा विश्वास किया जाता एवं कहा जाता है की पांडवो ने अपनी अंतिम यात्रा हिमालय के प्रस्थान से पूर्व इस चारभुजा जी की मूर्ति के दर्शन किया थे ।
इस मंदिर एवं मूर्ति की रक्षा हेतु 125 युद्ध हुए एवं अनेक बार मूर्ति की रक्षा के निमित्त इस श्री विग्रह जी को जल में सुरक्षित रखवाया गया था। वर्तमान में श्री गढ़बोर चारभुजा जी की व इस मंदिर की पूजा गुर्जर पुजारियों द्वारा बड़े उत्तम तरीके से सम्पादित की जाती है। गर्भ गृह के अंदर की और दरवाजों में सोने का एवं बाहर चांदी का कार्य किया हुआ है । श्री विग्रह के सम्मुख ही भगवान के वाहन गरुड़ जी विराज मान है ।

मेला व विशेष अवसर :

भाद्र पद मास की शुक्ल एकादशी यानी जलझूलनी एकादशी को विशाल मेला लगता है, लाखो श्रद्धालु पुरे भारत व अन्य देशो से दर्शन करने आते है इस दिन भगवान श्री चारभुजा नाथ की बड़ी ही मनमोहक सवारी निकाली जाती है। जिसमे श्री ठाकुर जी को सोने और चाँदी की पालकी ( बेवाण ) में बैठाया जाता है। और सवारी व गाजे बाजे के साथ, रंग गुलाल उडाते और गीत गाते हजारों की संख्या में लोग पास में स्थित दूधतलाई नामक सरोवर में विशेष स्नान हेतु श्री भगवान की चल मूर्ति को ले जाया जाता है जहां विधिवत स्नान व पूजा अर्चना आदि की जाती है । इस दिन चारों ओर उल्लास का माहौल होता है । औरतें गीत भजन आदि गाती हैं और नृत्य करती है और हजारो लोग भगवान चारभुजा की जय जयकार करते हुए एक विशेष तरह की सवारी निकलते हैं । एवं स्नान उपरांत पुष्पों का श्रृंगार एवं इत्र का छिड़काव किया जाता है । और वापस निज मंदिर की और प्रस्थान होता है

अन्य पर्व

होली, नवरात्री ,राम नवमी, दीपावली, आदि दिवसों पर भी विशेष उत्सव मानाये जाते है ।

मंदिर :

मंदिर की दीवारो पर कांच का अद्भुत कार्य किया हुआ है, एवं भगवान श्री चारभुजा जी की मूर्ति बड़ी आकर्षक एवं मन को अजीब शान्ति देने वाली है ।

आसपास अन्य देखने योग्य स्थान

मंदिर स्थित ग्राम के आस पास कई स्थल है जैसे रोकड़ियाँ हनुमान जी का मंदिर सेवंत्री ग्राम में गोमती नदी पर बना लक्ष्मण झूला, श्री राम मंदिर, और श्री रूप नारायण जी एवं कुम्भल गढ़ किला ,परसु राम महादेव , रणकपुर जैन मंदिर , कांकरोली के श्री द्वारकाधीश जी का मंदिर एवं श्री नाथजी नाथद्वारा यह सब इस तीर्थ से ३० से ४० किलोमीटर की दूरी पर ही आरावली पर्वत माला की श्रृंखलाओ में स्थित है ।
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1 Comment

  1. Visit website dedicated to Shri Charbhuja Nath : https://www.charbhujaji.com/

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